Lissa Extraction: उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में हर साल जंगलों में लगने वाली आग से होने वाले नुकसान को रोकने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए वन विभाग ने इस बार एक नई और व्यावहारिक पहल शुरू की है। वन विभाग पौड़ी द्वारा लीसा दोहन (Lissa Extraction) से रोजगार सृजन एवं वनाग्नि सुरक्षा जन-जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ जंगलों को आग से सुरक्षित रखना है।
ग्रामीणों को आजीविका से जोड़ने का प्रयास
इस कार्यक्रम के तहत स्थानीय ग्रामीणों, खासकर महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को लीसा (चीड़ की राल) दोहन (Lissa Extraction) से जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम में शामिल विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि लीसा दोहन (Lissa Extraction) केवल वन संपदा के संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक मजबूत विकल्प भी बन सकता है। इससे लोगों की आय बढ़ेगी और गांवों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।
READ MORE: सिलक्यारा टनल से जनवरी 2027 तक ट्रैफिक संचालन की तैयारी, काम अंतिम चरण में
वनाग्नि रोकथाम में जनसहभागिता पर जोर
विधायक पोरी ने अपने संबोधन में कहा कि जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए केवल विभागीय प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसमें आम जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के जन-जागरूकता कार्यक्रम लोगों को वन संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से पलायन पर भी रोक लगेगी, जो पहाड़ी क्षेत्रों की बड़ी समस्या है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से पहुंचा संदेश
कार्यक्रम की एक खास झलक तब देखने को मिली, जब प्रसिद्ध लोकगायक गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके लोकगीतों और प्रेरणादायक गीतों के माध्यम से वन संरक्षण और वनाग्नि सुरक्षा का संदेश प्रभावी तरीके से जनसमूह तक पहुंचा। लोकसंगीत के जरिए लोगों को जंगलों के महत्व और उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया गया।
READ MORE: उत्तराखंड का चुनावी बजट, 1 लाख करोड़ का खाका, सरकार के सामने बड़ी चुनौती
वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से हो रहा लीसा दोहन
गढ़वाल वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) महातिम यादव ने बताया कि वन विभाग अब लीसा विदोहन की प्रक्रिया को पूरी तरह संगठित, वैज्ञानिक और सुरक्षित पद्धति से संचालित कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले परंपरागत और अवैज्ञानिक तरीकों से राल निकासी की जाती थी, जिससे पेड़ों को नुकसान पहुंचता था। अब प्रशिक्षित श्रमिकों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार लीसा निकाला जा रहा है, जिससे वन संपदा का संरक्षण भी सुनिश्चित हो रहा है।
ग्राम पंचायतों को मिलेगा राजस्व का लाभ
DFO महातिम यादव ने यह भी बताया कि लीसा दोहन से प्राप्त होने वाले राजस्व का एक बड़ा हिस्सा संबंधित ग्राम पंचायतों को दिया जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, सामुदायिक भवन, स्वच्छता और अन्य जनहित के विकास कार्यों को गति मिलती है। इस तरह वन विभाग की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उत्तराखंड की बड़ी खबर देखने के लिये क्लिक करे
वनाग्नि की घटनाओं में कमी की उम्मीद
वन विभाग का मानना है कि नियंत्रित और वैज्ञानिक Lissa Extraction से चीड़ के पेड़ों में मौजूद ज्वलनशील पदार्थों का दबाव कम होता है। इससे गर्मियों के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कमी आने की संभावना रहती है। यह पहल वनाग्नि रोकथाम की दिशा में एक प्रभावी कदम मानी जा रही है।
युवाओं और महिलाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
Lissa Extraction योजना के तहत स्थानीय युवाओं और महिलाओं को न केवल मौसमी, बल्कि सतत रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। इससे गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकने में मदद मिलेगी। ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में काम मिलने से उनकी आजीविका सुरक्षित होगी और सामाजिक ढांचा भी मजबूत होगा।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
जन-जागरूकता अभियान से बढ़ेगा संरक्षण
कार्यक्रम के दौरान वन विभाग द्वारा व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया। नुक्कड़ नाटकों, लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को जंगलों के महत्व, आग से होने वाले नुकसान और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता के बारे में बताया गया। विभागीय अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच संवाद स्थापित कर यह संदेश दिया गया कि वन संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ
पौड़ी में शुरू की गई यह पहल पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। यदि Lissa Extraction कार्यक्रम को जनसहभागिता और निरंतर समर्थन मिलता है, तो आने वाले वर्षों में यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking



