Silkyara Tunnel: अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो उत्तराखंड की बहुचर्चित और संवेदनशील सिलक्यारा सुरंग में जनवरी–फरवरी 2027 तक यातायात शुरू हो जाएगा। यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन इस सुरंग का करीब 90 प्रतिशत सिविल कार्य पूरा किया जा चुका है और अब इलेक्ट्रिकल व तकनीकी कार्यों को तेज गति से अंतिम रूप दिया जा रहा है। Silkyara Tunnel शुरू होने के बाद न केवल गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी कम होगी, बल्कि यात्रियों को राड़ी टॉप के जाम और मौसम जनित परेशानियों से भी राहत मिलेगी।
अंतिम चरण में पहुंचा निर्माण कार्य
एनएचआईडीसीएल की देखरेख में 1384 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह लगभग 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग अब अपने अंतिम चरण में है। कार्यदायी संस्था नवयुगा कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, सुरंग की लाइनिंग, सेफ्टी सिस्टम, वेंटिलेशन और लाइटिंग जैसे जरूरी काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। कंपनी के डीपीएम (उप परियोजना प्रबंधक) श्रीराम का कहना है कि सभी तकनीकी मानकों को ध्यान में रखते हुए काम किया जा रहा है और तय समय सीमा के भीतर इसे यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
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चारधाम यात्रा को मिलेगी बड़ी राहत
Silkyara Tunnel चारधाम यात्रा को और अधिक सुगम बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। वर्तमान में यमुनोत्री मार्ग पर राड़ी टॉप यात्रियों के लिए बड़ी बाधा बना रहता है, जहां अक्सर जाम और भूस्खलन की समस्या सामने आती है। सुरंग के शुरू होने से यह जोखिम भरा मार्ग काफी हद तक बायपास हो जाएगा। साथ ही, शीतकाल में बर्फबारी के कारण सड़क बंद होने की परेशानी से भी निजात मिलेगी, जिससे सालभर आवाजाही संभव हो सकेगी।
गंगा और यमुना घाटी के बीच दूरी होगी कम
Silkyara Tunnel के चालू होने से गंगा और यमुना घाटी के बीच यात्रा का समय भी कम हो जाएगा। स्थानीय लोगों के साथ-साथ व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन सेवाओं के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरंग न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक साबित होगी।
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हादसे के बाद रुका था काम, फिर शुरू हुई नई रफ्तार
Silkyara Tunnel नवंबर 2023 में उस समय दुनिया भर में चर्चा में आ गई थी, जब दीपावली की सुबह सुरंग का एक हिस्सा अचानक ढह गया था। इस हादसे में 41 मजदूर अंदर फंस गए थे, जिन्हें बाहर निकालने में 17 दिन का लंबा और चुनौतीपूर्ण समय लगा। इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों की भी नजरें टिकी थीं। सफल रेस्क्यू के बाद सभी मजदूर सुरक्षित बाहर निकले और राहत की सांस ली।

वैज्ञानिक जांच के बाद दोबारा शुरू हुआ निर्माण
हादसे के बाद करीब छह महीने तक सुरंग का निर्माण कार्य बंद रहा। इस दौरान भूवैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से सुरंग की संरचना, मिट्टी की स्थिति और सुरक्षा मानकों की गहन जांच की गई। सभी जरूरी सुधार और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को शामिल करने के बाद निर्माण कार्य को दोबारा शुरू किया गया। अधिकारियों के अनुसार, अब सुरंग में पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक सेफ्टी सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
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प्रधानमंत्री के उद्घाटन की चर्चा तेज
Silkyara Tunnel के उद्घाटन को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, परियोजना पूरी होने के बाद इसके उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और निर्माण एजेंसी स्तर पर तैयारियां उसी अनुसार की जा रही हैं।
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स्थानीय लोगों और यात्रियों में उम्मीद
Silkyara Tunnel के जल्द शुरू होने की खबर से स्थानीय लोगों और चारधाम यात्रियों में खासा उत्साह है। लोगों का कहना है कि यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की जरूरत रही है। Silkyara Tunnel चालू होने के बाद न केवल यात्रा सुरक्षित और आरामदायक होगी, बल्कि उत्तरकाशी जिले को विकास की नई दिशा भी मिलेगी। अब सभी की नजरें जनवरी–फरवरी 2027 पर टिकी हैं, जब Silkyara Tunnel से होकर यातायात के पहिए दौड़ने की उम्मीद है।
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