Haryana labour welfare services: हरियाणा के लाखों श्रमिकों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहायता के लिए दफ्तर-दर-दफ्तर भटकना नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार ने श्रम कल्याण बोर्ड की 29 महत्वपूर्ण सेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम (Haryana labour welfare services) के तहत शामिल कर दिया है। इसका सीधा मतलब है अब तय समयसीमा में ही श्रमिकों और उनके परिवारों को लाभ मिलना अनिवार्य होगा, वरना संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
जवाबदेही तय, अधिकारी अब नहीं कर पाएंगे टालमटोल
इस फैसले के बाद श्रम कल्याण अधिकारी से लेकर श्रम आयुक्त (Haryana labour welfare services) तक सभी पर स्पष्ट जिम्मेदारी तय कर दी गई है। अगर किसी सेवा में देरी होती है तो उसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। सरकार का उद्देश्य साफ है श्रमिकों को उनका हक समय पर और बिना किसी परेशानी के मिले।
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बच्चों की पढ़ाई से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक मदद
सरकार ने श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को भी प्राथमिकता दी है। पहली से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल की वर्दी, किताबें, कॉपियां और छात्रवृत्ति 60 दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाएंगी। इतना ही नहीं, व्यावसायिक कोर्सों की प्रवेश परीक्षा, यूपीएससी और एचपीएससी की मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को भी तय समय में वित्तीय सहायता मिलेगी। यह कदम श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने वाला साबित हो सकता है।

शादी, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी सहायता
श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक और व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई और सेवाओं को भी इस अधिनियम में शामिल किया है। बेटे-बेटियों की शादी के लिए कन्यादान और शगुन, महिलाओं की डिलीवरी, दांतों का इलाज, साइकिल, चश्मा और सिलाई मशीन खरीदने जैसी जरूरतों के लिए 60 दिन में सहायता राशि जारी की जाएगी। इसके अलावा एलटीसी, कृत्रिम अंग, श्रवण मशीन, दिव्यांगों के लिए तिपहिया वाहन और पुनर्वास से जुड़ी सहायता भी तय समय में मिलेगी।
खेल और संस्कृति को भी मिलेगा बढ़ावा
श्रमिक परिवारों के बच्चे अगर खेल या सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं, तो उन्हें भी अब आर्थिक सहयोग समय पर मिलेगा। इससे न केवल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि श्रमिक वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर भी मिल सकेंगे।
मृत्यु के बाद 15 दिन में सहायता – परिवार को तुरंत संबल
इस फैसले का सबसे संवेदनशील और अहम पहलू है – मृत्यु उपरांत सहायता। अगर किसी श्रमिक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके आश्रितों को 15 दिन के भीतर वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके तहत मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा योजना, दाह संस्कार के लिए आर्थिक मदद और अन्य मृत्यु उपरांत लाभ शामिल हैं। यह व्यवस्था संकट (Haryana labour welfare services) के समय परिवार को तुरंत संबल देने में मददगार साबित होगी।
बदला हुआ एंगल – कल्याण से सिस्टम सुधार की ओर कदम
यह फैसला सिर्फ योजनाओं (Haryana labour welfare services) की घोषणा नहीं, बल्कि सिस्टम सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अक्सर सरकारी लाभ देरी और प्रक्रिया की जटिलताओं में उलझ जाते थे, लेकिन सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत आने से अब ‘समय’ सबसे अहम फैक्टर बन गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रमिकों का भरोसा भी सिस्टम पर मजबूत होगा।
हरियाणा सरकार का यह कदम श्रमिक कल्याण को कागजों से निकालकर जमीन पर उतारने की कोशिश है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
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