Uttarakhand Green Cess: उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण और यातायात नियंत्रण को लेकर परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ई-डिटेक्शन प्रणाली के जरिए ग्रीन सेस की वसूली की जा रही है। फिलहाल यह व्यवस्था हरिद्वार जिले के गुरुकुल नारसन बॉर्डर पर लागू है, लेकिन आने वाले कुछ ही दिनों में प्रदेश के 14 प्रमुख बॉर्डरों पर इसे शुरू किया जाएगा। परिवहन विभाग का लक्ष्य चारधाम यात्रा से पहले प्रदेश के सभी 37 बॉर्डरों से ग्रीन सेस वसूली की व्यवस्था लागू करना है।
गुरुकुल नारसन बॉर्डर से रोजाना हजार वाहनों की एंट्री
परिवहन विभाग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, हरिद्वार जिले के गुरुकुल नारसन बॉर्डर से प्रतिदिन करीब एक हजार बाहरी राज्यों के वाहन उत्तराखंड में प्रवेश कर रहे हैं। इन सभी वाहनों से Uttarakhand Green Cess वसूला जा रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल राजस्व में बढ़ोतरी हो रही है, बल्कि वाहनों की निगरानी भी बेहतर ढंग से की जा रही है।
14 बॉर्डरों पर जल्द शुरू होगी ग्रीन सेस वसूली
शुरुआती चरण में सिस्टम के सफल संचालन के बाद परिवहन विभाग ने इसे विस्तार देने का फैसला लिया है। विभाग की योजना के अनुसार जल्द ही प्रदेश के 14 बॉर्डरों पर Uttarakhand Green Cess वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से सभी 37 बॉर्डर एरिया को इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
150 ANPR कैमरों से होगी निगरानी
परिवहन विभाग ने जानकारी दी है कि प्रदेशभर में बॉर्डर एरिया पर लगाए गए 150 एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों को एक्टिव किया जा रहा है। इन कैमरों की मदद से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले प्रत्येक बाहरी वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन कर ग्रीन सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा, जिसके बाद फास्टैग के माध्यम से ग्रीन सेस की कटौती की जाएगी।
14 जनवरी से शुरू हुई थी प्रक्रिया
गौरतलब है कि उत्तराखंड परिवहन विभाग ने अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों से Uttarakhand Green Cess वसूली की प्रक्रिया 14 जनवरी से शुरू की थी। शुरुआती दिनों में तकनीकी समस्याएं जरूर सामने आईं, लेकिन अब यह व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित हो रही है। विभाग का कहना है कि तकनीकी दिक्कतों को दूर कर लिया गया है और सिस्टम अब स्थिर रूप से काम कर रहा है।
चारधाम यात्रा से पहले पूरी तैयारी
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा से पहले सभी 37 बॉर्डर एरिया में ग्रीन सेस वसूली की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों वाहनों की आवाजाही होती है, ऐसे में यह प्रणाली ट्रैफिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिहाज से अहम साबित होगी।
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ट्रायल बेसिस पर सफल रहा सिस्टम
उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी ने बताया कि यह सिस्टम देश में पहली बार किसी राज्य में इस स्तर पर लागू किया गया है। इसी वजह से इसे ट्रायल बेसिस पर पहले एक बॉर्डर से शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि गुरुकुल नारसन बॉर्डर पर इस प्रणाली का रिस्पांस बेहद सकारात्मक रहा है और फिलहाल किसी बड़ी तकनीकी खामी की शिकायत नहीं मिल रही है।
तकनीकी चुनौतियां भी आईं सामने
हालांकि, विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि नई प्रणाली होने के कारण कुछ चुनौतियां सामने आईं। खासकर एएनपीआर कैमरों से नंबर प्लेट की सही पहचान, डाटा को ग्रीन सॉफ्टवेयर तक भेजना और वहां से फास्टैग सिस्टम से लिंक करने में शुरुआती दौर में दिक्कतें आईं। लेकिन लगातार मॉनिटरिंग और तकनीकी सुधार के बाद यह ट्रायल सफल रहा है।
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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
Uttarakhand Green Cess वसूली की इस व्यवस्था को राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देख रही है। बाहरी वाहनों से प्राप्त होने वाला ग्रीन सेस राज्य में पर्यावरण सुधार, प्रदूषण नियंत्रण और सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में इस्तेमाल किया जाएगा।
जल्द पूरे प्रदेश में लागू होगी व्यवस्था
परिवहन विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में सभी बॉर्डर एरिया पर यह प्रणाली पूरी तरह लागू हो जाएगी। इससे न केवल Uttarakhand Green Cess वसूली पारदर्शी होगी, बल्कि उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जा सकेगा, जो भविष्य में ट्रैफिक और सुरक्षा प्रबंधन में मददगार साबित होगा।
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