Bageshwar Dham Sanatan movement: बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा चलाया जा रहा सनातन धर्म जागरण अभियान (Bageshwar Dham Sanatan movement) अब केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रह गया है। राम कथा के मंच से उठती उनकी आवाज आज सामाजिक एकता, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक बनती जा रही है। हालिया आयोजन में जिस तरह से लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि सनातन विचारधारा एक बार फिर जनमानस के केंद्र में लौट रही है।
Read More: अंतरिक्ष मिशन जिसने इतिहास रच दिया, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से किया गया सम्मानित
राम कथा नहीं, सांस्कृतिक संवाद का मंच
राम कथा के दौरान बाबा बागेश्वर के प्रवचनों में केवल धार्मिक कथाएं नहीं थीं, बल्कि सनातन संस्कृति, देशभक्ति, सामाजिक समरसता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण जैसे विषय प्रमुखता से उभरे। उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि सनातन धर्म किसी एक वर्ग या पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने वाली जीवन पद्धति है। श्रद्धालुओं के बीच उनके शब्दों का गहरा असर देखने को मिला। युवाओं में जहां आत्मगौरव और पहचान की भावना दिखी, वहीं महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने आयोजन को एक सामूहिक सामाजिक स्वरूप दे दिया।
सोशल मीडिया से जनसरोकार तक
बाबा बागेश्वर (Bageshwar Dham Sanatan movement) के प्रवचनों के वीडियो आए दिन सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते हैं, लेकिन इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है। ज़मीनी स्तर पर भी उनके विचार बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ रहे हैं। विशेष रूप से युवाओं में सनातन परंपराओं को लेकर नई रुचि और सवालों के साथ जुड़ाव यह संकेत देता है कि यह आंदोलन भविष्य की दिशा तय करने की क्षमता रखता है।

विवाद पर संवाद का संदेश
कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर बाबा बागेश्वर का बयान चर्चा का केंद्र रहा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,’दोनों सनातनी हैं, दोनों अपने हैं। विवाद को संवाद से सुलझाया जाना चाहिए। सनातन समाज (Bageshwar Dham Sanatan movement) की एकता सबसे जरूरी है।’ उनका यह रुख कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां अक्सर धार्मिक मतभेद सार्वजनिक टकराव का रूप ले लेते हैं, वहीं बाबा बागेश्वर ने आपसी संवाद और सौहार्द को प्राथमिकता देने की बात कही। इसे सनातन समाज में एकजुटता की दिशा में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
अनुशासन और व्यवस्थाओं की मिसाल
इतने विशाल आयोजन के बावजूद प्रशासन और आयोजन समिति की व्यवस्थाएं सराहनीय रहीं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। ट्रैफिक नियंत्रण, मेडिकल टीमें, पेयजल, स्वच्छता और आपात सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। आयोजन स्थल पर अनुशासन और सुव्यवस्था स्पष्ट नजर आई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। यह दिखाता है कि धार्मिक आयोजन भी आधुनिक प्रबंधन और जिम्मेदारी के साथ आयोजित किए जा सकते हैं।
रामगंज मंडी में भक्ति का माहौल
पूरे रामगंज मंडी क्षेत्र में भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण बना रहा। “जय श्री राम” के जयकारों से गूंजते वातावरण में श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा साफ झलक रही थी। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर (Bageshwar Dham Sanatan movement) पर भी एक नया मानक स्थापित करता नजर आया।
सनातन की नई परिभाषा
बाबा बागेश्वर का यह आयोजन यह संकेत देता है कि सनातन धर्म आज आस्था से आगे बढ़कर एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले रहा है जहां संवाद, एकता और सांस्कृतिक चेतना को समान महत्व दिया जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन भारत की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।



