Silent Kidney Disease: आज के दौर में जिम, मसल्स और सिक्स-पैक बॉडी कई पुरुषों की प्राथमिकता बन चुकी है। प्रोटीन शेक, सप्लीमेंट्स और हैवी वर्कआउट रोजमर्रा का हिस्सा हैं। लेकिन इसी फिटनेस क्रेज में एक अहम अंग अक्सर नजरअंदाज हो जाता है-किडनी। डॉक्टरों के अनुसार, पेशाब में प्रोटीन का आना, जिसे मेडिकल भाषा में प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है, किडनी खराब (Silent Kidney Disease) होने का शुरुआती लेकिन गंभीर संकेत हो सकता है।
किडनी – शरीर का साइलेंट वर्कर
किडनी हमारे शरीर का फिल्टर सिस्टम है। यह खून से गंदगी, टॉक्सिन्स और अतिरिक्त पानी बाहर निकालती है। इसके अलावा किडनी ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने और रेड ब्लड सेल्स बनाने में भी अहम भूमिका निभाती है। स्वस्थ किडनी के फिल्टर जिन्हें ग्लोमेरुली कहा जाता है यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रोटीन जैसे जरूरी तत्व यूरिन में न जाएं।
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प्रोटीन्यूरिया क्या है?
जब किडनी (Silent Kidney Disease) के ये फिल्टर कमजोर होने लगते हैं, तो प्रोटीन पेशाब के जरिए बाहर निकलने लगता है। यही स्थिति प्रोटीन्यूरिया कहलाती है। इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती दौर में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसी वजह से इसे ‘साइलेंट किडनी डिजीज’ भी कहा जाता है। समय रहते पहचान न हो, तो यह धीरे-धीरे किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है।
लक्षण जो देर से दिखते हैं
जब प्रोटीन्यूरिया बढ़ने लगता है, तब कुछ संकेत नजर आने लगते हैं, जैसे-
- पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
- झागदार या फेन वाला पेशाब
- जल्दी थकान महसूस होना
- रात में बार-बार पेशाब आना
- वजन अचानक बढ़ना (फ्लूइड रिटेंशन के कारण)
समस्या यह है कि अधिकतर पुरुष इन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

पुरुषों में खतरा क्यों ज्यादा?
विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों में कम उम्र में हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज की संभावना अधिक होती है, जो किडनी खराब होने के बड़े कारण हैं। इसके अलावा-
- ज्यादा प्रोटीन और सप्लीमेंट्स का अनियंत्रित सेवन
- धूम्रपान और शराब
- प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट
- नींद की कमी और स्ट्रेस
ये सभी आदतें किडनी (Silent Kidney Disease) पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। साथ ही पुरुष आमतौर पर डॉक्टर के पास देर से जाते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है।
पहचान आसान है, बस जांच जरूरी
प्रोटीन्यूरिया की पहचान किसी महंगे या जटिल टेस्ट से नहीं, बल्कि साधारण यूरिन टेस्ट से हो सकती है। अगर पेशाब की जांच में प्रोटीन पाया जाता है, तो डॉक्टर आगे ये जांच करा सकते हैं-
स्पॉट यूरिन प्रोटीन-क्रिएटिनिन रेशियो
- 24 घंटे की यूरिन जांच
- ब्लड टेस्ट (किडनी फंक्शन के लिए)
समय पर जांच से किडनी को और नुकसान से बचाया जा सकता है।
फिटनेस के साथ किडनी की भी केयर
अगर आप जिम जाते हैं या फिट रहने की कोशिश कर रहे हैं, तो किडनी हेल्थ को नजरअंदाज न करें। कुछ जरूरी उपाय-
- ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें
- जरूरत से ज्यादा प्रोटीन और सप्लीमेंट्स लेने से बचें
- वजन संतुलित रखें और नियमित एक्सरसाइज करें
- प्रोसेस्ड फूड, मीठे ड्रिंक्स और लाल मांस कम करें
- फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हल्का प्रोटीन अपनाएं
- साल में कम से कम एक बार यूरिन और ब्लड टेस्ट जरूर कराएं
ताकत सिर्फ मसल्स में नहीं
सच्ची फिटनेस केवल मसल्स और बॉडी शेप तक सीमित नहीं है। किडनी (Silent Kidney Disease) जैसे अंग चुपचाप काम करते हैं, लेकिन जरा सी लापरवाही गंभीर बीमारी में बदल सकती है। अगर पेशाब में प्रोटीन की पहचान समय रहते हो जाए, तो किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
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