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उत्तराखंड

VB G Ram Ji Scheme: टिहरी गढ़वाल में वीबी-जी राम जी योजना पर उठे सवाल, मजदूरी, नेटवर्क और भुगतान बनी बड़ी चुनौती

Manisha
Last updated: 2026-01-13 7:51 अपराह्न
Manisha Published 2026-01-13
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VB G Ram Ji Scheme
VB G Ram Ji Scheme: टिहरी गढ़वाल में वीबी-जी राम जी योजना पर उठे सवाल, मजदूरी, नेटवर्क और भुगतान बनी बड़ी चुनौती
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VB G Ram Ji Scheme: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह लागू की गई नई रोजगार गारंटी योजना VB G Ram Ji Scheme(विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण) को लेकर उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में असंतोष सामने आने लगा है। यह योजना भले ही ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोजगार की गारंटी देती हो, लेकिन टिहरी गढ़वाल जैसे दूरस्थ इलाकों में मजदूरी की दर, नेटवर्क समस्या और भुगतान में देरी के कारण श्रमिकों और ग्राम प्रधानों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।

Contents
मनरेगा से बदला नाम, लेकिन मजदूरी जस की तसकमजोर नेटवर्क बना सबसे बड़ी बाधाग्राम प्रधानों पर बढ़ता आर्थिक बोझVB G Ram Ji Scheme में राज्यों की बढ़ी जिम्मेदारीप्रशासन ने मानी समस्याएं, समाधान का भरोसाग्रामीणों की मांग- मजदूरी बढ़े, व्यवस्था सुधरे

मनरेगा से बदला नाम, लेकिन मजदूरी जस की तस

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा से VB G Ram Ji Scheme  में नाम और कार्य दिवस तो बढ़े हैं, लेकिन मजदूरी दर में कोई ठोस बढ़ोतरी नहीं हुई। वर्तमान में श्रमिकों को लगभग 252 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है, जबकि निजी क्षेत्र या अन्य निर्माण कार्यों में 400 से 500 रुपये तक आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे में ग्रामीण मजदूरों का इस योजना से मोहभंग होना स्वाभाविक है।

कर्णगांव की श्रमिक पवना देवी बताती हैं कि दिनभर मेहनत करने के बाद भी उन्हें पूरी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि कम मजदूरी और भुगतान में देरी के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

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कमजोर नेटवर्क बना सबसे बड़ी बाधा

टिहरी गढ़वाल के कई गांवों में इंटरनेट नेटवर्क की स्थिति बेहद कमजोर है। VB G Ram Ji Scheme  पूरी तरह ऑनलाइन उपस्थिति और सत्यापन पर आधारित है, लेकिन नेटवर्क न होने के कारण श्रमिकों को जॉब कार्ड सत्यापन और उपस्थिति दर्ज कराने के लिए जंगलों या ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है। सेमल्थ गांव के ग्रामीणों का कहना है कि कई बार नेटवर्क न मिलने के कारण पूरे दिन काम करने के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मजदूरी अटक जाती है।

ग्राम प्रधानों पर बढ़ता आर्थिक बोझ

केवल श्रमिक ही नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान भी इस योजना से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई गांवों में मनरेगा के दौरान कराए गए कार्यों की सामग्री- जैसे सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री का भुगतान वर्षों से लंबित है। दुकानदारों का दबाव बढ़ने पर प्रधानों को अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

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धारकोट के ग्राम प्रधान योगेंद्र का कहना है कि भूमि सुधार जैसे कार्यों में कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है, लेकिन कुशल मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं होता। मौजूदा समय में कुशल मिस्त्री 700 से 800 रुपये प्रतिदिन मांगते हैं, जबकि योजना में निर्धारित मजदूरी इससे कहीं कम है।

VB G Ram Ji Scheme में राज्यों की बढ़ी जिम्मेदारी

VB G Ram Ji Scheme के तहत अब केंद्र सरकार अकेले पूरा खर्च नहीं उठाती। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का खर्च अनुपात 90:10 रखा गया है, जबकि अन्य राज्यों में यह 60:40 है। इससे राज्यों पर भी वित्तीय दबाव बढ़ा है, जिसका असर भुगतान प्रक्रिया पर देखने को मिल रहा है।

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प्रशासन ने मानी समस्याएं, समाधान का भरोसा

टिहरी गढ़वाल की मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) वरुणा अग्रवाल ने स्वीकार किया है कि जिले के कई दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासन को अवगत कराया गया है और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है। साथ ही जिन स्थानों पर सामग्री भुगतान लंबित है, वहां संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीणों की मांग- मजदूरी बढ़े, व्यवस्था सुधरे

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि सरकार या तो कार्य दिवस कम करे या फिर मजदूरी दर में वास्तविक बढ़ोतरी करे। साथ ही नेटवर्क समस्या का स्थायी समाधान और सामग्री भुगतान में तेजी लाई जाए, ताकि वीबी-जी राम जी योजना वास्तव में ग्रामीण रोजगार और आजीविका का मजबूत आधार बन सके। फिलहाल टिहरी गढ़वाल में यह योजना उम्मीदों से ज्यादा चुनौतियों का सामना कर रही है।

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