Baghpat Teacher Blood Letter Case : उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां एक महिला शिक्षिका ने इतना बड़ा कदम उठाया कि पूरा प्रशासन हिल गया। शिक्षिका ने न्याय की गुहार लगाते हुए खून से लिखा हुआ पत्र जिलाधिकारी को सौंपा और राष्ट्रपति से अपने पूरे परिवार के साथ इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी। यह घटना न सिर्फ दुखद है, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
Baghpat Teacher Blood Letter Case खून से लिखा पत्र क्यों?
बागपत के हजारी लाल इंटर कॉलेज में काम करने वाली महिला टीचर का कहना है कि वह लंबे समय से मानसिक और शारीरिक परेशानियों से गुजर रही हैं। कॉलेज प्रबंधन द्वारा बार-बार उन्हें अपमानित किया जाता था और उन पर बेवजह दबाव बनाया जाता था।
शिक्षिका का कहना है कि वह अब यह सब सहन करने की स्थिति में नहीं थीं। इसी वजह से उन्होंने खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर की, ताकि उनकी आवाज सुनी जा सके।
Baghpat Teacher Blood Letter Case: कलेक्ट्रेट पहुंचकर मांगा न्याय
सोमवार को महिला टीचर अपने परिवार और समाज के लोगों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचीं। वहां उन्होंने जिलाधिकारी को खून से लिखा ज्ञापन सौंपा। इस पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से परिवार सहित इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी।
यह पत्र देखकर वहां मौजूद अधिकारी और लोग भी भावुक हो गए। किसी के लिए भी यह देखना आसान नहीं था कि एक शिक्षिका को इस हद तक जाना पड़ा।
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Baghpat Teacher Blood Letter Case: 2022 में हुई थी नियुक्ति
पीड़ित शिक्षिका बुलंदशहर जिले की रहने वाली हैं। साल 2022 में उनका चयन शिक्षक के रूप में हुआ था। इसके बाद उनकी नियुक्ति बागपत के हजारी लाल इंटर कॉलेज में की गई।
शिक्षिका का कहना है कि कॉलेज में जॉइन करते ही उनके साथ गलत व्यवहार शुरू हो गया। उनका आरोप है कि कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य और वर्तमान प्रबंधक राजेंद्र सिंह भाटी लगातार उन्हें परेशान करते रहे। कभी बिना वजह डांटना, कभी काम को लेकर नीचा दिखाना और कभी मानसिक दबाव बनाना उनकी रोज की परेशानी बन गई।
Baghpat Teacher Blood Letter Case: समर्थन में उतरे लोग
जब यह मामला सामने आया, तो शिक्षिका के समर्थन में कई लोग एकजुट हो गए। बड़ी संख्या में लोग जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने अपना खून एकत्र कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन लिखा। यह नजारा बहुत ही दर्दनाक और भावुक था। लोगों का कहना था कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी।
Baghpat Teacher Blood Letter Case : प्रशासन पर लगाए आरोप
महिला टीचर का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन कहीं से कोई ठोस मदद नहीं मिली। उनका कहना है कि प्रशासन की इसी अनदेखी ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक शिक्षिका की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम लोगों की हालत क्या होगी?
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Baghpat Teacher Blood Letter Case मानवाधिकार संगठनों ने उठाई आवाज
इस मामले को गंभीर मानते हुए मानवाधिकार संगठनों ने भी दखल दिया है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल एक महिला टीचर का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ है।
Baghpat Teacher Blood Letter Case: डीएम ने दिया जांच का भरोसा
बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने खून से लिखा ज्ञापन स्वीकार किया और जांच का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि आरोप बहुत गंभीर हैं और अगर जांच में दोषी पाए गए, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन ने यह भी कहा है कि शिक्षिका की सुरक्षा और मानसिक स्थिति का ध्यान रखा जाएगा।
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Baghpat Teacher Blood Letter Case सिस्टम पर उठते सवाल
यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है। क्या न्याय पाने के लिए किसी को खून से पत्र लिखना पड़े? क्या समय रहते कार्रवाई होती, तो यह सब नहीं होता?
फिलहाल पूरा जिला इस घटना से हैरान है। अब सभी की नजरें जांच और आने वाले फैसले पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस बार न्याय जरूर मिलेगा और ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
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