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Lokhitkranti > ताज़ा खबरे > EPFO पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 साल से जमी सैलरी सीमा पर सरकार को 4 महीने का अल्टीमेटम
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EPFO पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 साल से जमी सैलरी सीमा पर सरकार को 4 महीने का अल्टीमेटम

Tej
Last updated: 2026-01-05 11:15 अपराह्न
Tej Published 2026-01-05
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EPFO पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
EPFO पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
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EPFO: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों के हित में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह EPF योजना की वेतन सीमा (Salary Ceiling) में संशोधन को लेकर चार महीने के भीतर ठोस निर्णय ले। खास बात यह है कि मौजूदा वेतन सीमा ₹15,000 पिछले 11 वर्षों से बिना बदलाव के लागू है।

Contents
क्या है पूरा मामला?70 साल में मनमाने ढंग से बदली गई सैलरी सीमाEPF योजना – पहले ज्यादा समावेशी, अब ज्यादा सीमितसरकारी सिफारिशें, लेकिन फैसला लंबितसुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देशकर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?अब आगे क्या?

यह आदेश न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

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क्या है पूरा मामला?

वर्तमान में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार, केवल वही कर्मचारी अनिवार्य रूप से EPF योजना के दायरे में आते हैं जिनका मासिक वेतन ₹15,000 या उससे कम है। इससे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को इस सामाजिक सुरक्षा योजना से बाहर रखा जाता है।

याचिका में तर्क दिया गया कि इससे बड़ी संख्या में कर्मचारी रिटायरमेंट सुरक्षा से वंचित रह जाते हैं, जो संविधान के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

70 साल में मनमाने ढंग से बदली गई सैलरी सीमा

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील प्रणव सचदेवा और नेहा राठी ने अदालत को बताया कि

  • कई राज्यों में न्यूनतम वेतन ही ₹15,000 से अधिक हो चुका है
  • इसके बावजूद EPF की सैलरी सीमा नहीं बढ़ाई गई
  • पिछले 70 वर्षों में वेतन सीमा का पुनरीक्षण बेहद अनियमित रहा

कभी 13-14 साल बाद संशोधन हुआ, तो कभी दशकों तक कोई बदलाव नहीं किया गया। इस दौरान महंगाई, प्रति व्यक्ति आय और जीवन-यापन लागत जैसे अहम आर्थिक कारकों को नजरअंदाज किया गया।

Supreme Court on EPFO
EPFO पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

EPF योजना – पहले ज्यादा समावेशी, अब ज्यादा सीमित

याचिका में यह भी कहा गया कि:

  • EPF योजना के शुरुआती 30 वर्षों में यह ज्यादा समावेशी थी
  • लेकिन पिछले तीन दशकों में नियम ऐसे बने कि कम कर्मचारी ही इसके दायरे में आ पाए

इसका सीधा असर यह हुआ कि आज EPF का लाभ पाने वाले कर्मचारियों की संख्या पहले की तुलना में कम हो गई है।

सरकारी सिफारिशें, लेकिन फैसला लंबित

दिलचस्प बात यह है कि

  • साल 2022 में EPFO की एक उप-समिति ने वेतन सीमा बढ़ाने की सिफारिश की थी
  • इस प्रस्ताव को केंद्रीय बोर्ड से भी मंजूरी मिल चुकी थी
  • इसके बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया
  • इसी देरी को याचिका में गंभीर लापरवाही बताया गया।

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सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए आदेश दिया कि

  • याचिकाकर्ता दो सप्ताह के भीतर आदेश की प्रति के साथ केंद्र सरकार को प्रतिवेदन देगा
  • केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर EPF वेतन सीमा पर निर्णय लेना होगा

अदालत ने संकेत दिया कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में अनिश्चितता लंबे समय तक नहीं चल सकती।

कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

अगर EPF की वेतन सीमा बढ़ती है तो

  • लाखों नए कर्मचारी EPF के दायरे में आएंगे
  • रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी
  • निजी क्षेत्र के मध्यम वर्गीय कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिलेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को अधिक न्यायसंगत बना सकता है।

अब आगे क्या?

अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं। सरकार अगर समयसीमा में फैसला लेती है तो यह:

  • EPF इतिहास का सबसे बड़ा सुधार हो सकता है
  • और करोड़ों कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है

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