Artificial Intelligence History: आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ एक तकनीक नहीं बल्कि पूरी दुनिया की दिशा बदलने वाली शक्ति बन चुकी है। कोई इससे कंटेंट तैयार कर रहा है, कोई इमेज बना रहा है, तो कोई सेकंडों में करोड़ों डेटा का विश्लेषण कर रहा है। लेकिन जिस AI को आज हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना चुके हैं, उसकी नींव किन महान दिमागों ने रखी यह सवाल अक्सर चर्चा से बाहर रह जाता है।
दिल्ली में चल रहे ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के बीच AI की उपलब्धियों पर वैश्विक चर्चा हो रही है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे उन वैज्ञानिकों की दशकों की मेहनत छिपी है, जिन्होंने मशीनों को सोचने, सीखने और समझने की क्षमता देने का सपना देखा था। आइए जानते हैं उन असली नायकों के बारे में, जिनकी वजह से AI आज हकीकत बन चुका है।
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इस वैज्ञानिक ने दिए AI शब्द
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत की बात करें तो सबसे पहला नाम सामने आता है जॉन मैकार्थी का। वही वैज्ञानिक जिन्होंने ‘Artificial Intelligence’ शब्द को जन्म दिया। 1956 में आयोजित डार्टमाउथ कॉन्फ्रेंस में उन्होंने AI को एक नई पहचान दी। उनका सपना था कि मशीनें इंसानों की तरह सोच सकें। उन्होंने LISP प्रोग्रामिंग भाषा विकसित की, जिसने दशकों तक AI रिसर्च की रीढ़ का काम किया। इस ऐतिहासिक योगदान के लिए उन्हें ट्यूरिंग अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

जेफ्री हिंटन थे डीप लर्निंग के गॉडफादर
जब दुनिया AI की संभावनाओं को लेकर संशय में थी तब ज्योफ्री हिंटन चुपचाप न्यूरल नेटवर्क पर काम कर रहे थे। उन्होंने बैकप्रोपेगेशन तकनीक के जरिए मशीनों को सीखने की ताकत दी। 2013 में गूगल से जुड़ने के बाद उनके काम ने AI की दिशा बदल दी। लेकिन 2023 में उन्होंने कंपनी छोड़कर AI के संभावित खतरों पर खुलकर चेतावनी दी।
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विजुअल AI की नींव रखने वाले Yann LeCun
फ्रांस के वैज्ञानिक यान लेकन ने कनवोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क (CNN) विकसित किया जो आज फेस रिकॉग्निशन, मेडिकल इमेजिंग और सेल्फ-ड्राइविंग कारों जैसी तकनीकों की आधारशिला है। उनका LeNet मॉडल बैंकों में चेक पर लिखे नंबर पहचानने के लिए इस्तेमाल हुआ। इसके बाद ही उनके लिए डीप र्निंग के व्यावहारिक उपयोग का रास्ता खुला। (Artificial Intelligence History)
मशीन की बुद्धिमत्ता को परखने वाला टेस्ट
अगर AI की बौद्धिक क्षमता को समझाने का श्रेय एलन ट्यूरिंग को दिया जाता है। उन्होंने कहा था कि यदि मशीन इंसान की तरह संवाद करे और इंसान फर्क न कर पाए, तो वह बुद्धिमान है। आज के चैटबॉट्स और जनरेटिव AI मॉडल इसी सोच से प्रेरित हैं। बता दें कि उनके नाम पर ही कंप्यूटर साइंस का सर्वोच्च सम्मान ट्यूरिंग अवॉर्ड दिया जाता है। (Artificial Intelligence History)
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AI को घर-घर पहुंचाने वाले शिक्षक
एंड्रयू एनजी ने AI को लैब से निकालकर आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया। Coursera के को-फाउंडर और DeepLearning.ai के संस्थापक के रूप में उन्होंने लाखों लोगों को AI की शिक्षा दी। उनकी रिसर्च ने स्पीच रिकॉग्निशन सिस्टम को मजबूत किया जो आज स्मार्टफोन से लेकर वर्चुअल असिस्टेंट तक हर जगह मौजूद है। (Artificial Intelligence History)
कल्पना से वास्तविकता तक
आज भले ही दुनिया चैटजीपीटी, जेमिनी या अन्य AI टूल्स की बात कर रही हो, लेकिन इसकी कहानी बहुत पहले ही शुरू हो गई थी। इन वैज्ञानिकों ने दशकों पहले ai के भविष्य को देख लिया था। उन्होंने मशीनों को सोचने, सीखने और समझने की ताकत दी। AI सिर्फ एक तकनीक नहीं बल्कि इंसानी कल्पना, शोध और दूरदृष्टि का परिणाम है। (Artificial Intelligence History)



