AI Content Rules 2026: आज यानी 20 फरवरी 2026 से भारत में AI (Artificial Intelligence) जेनरेटेड कंटेंट को लेकर नए कानून लागू हो गए हैं। अब सोशल मीडिया पर फोटो, वीडियो या ऑडियो शेयर करना पहले जैसा आसान नहीं है। अगर कोई यूजर या प्लेटफॉर्म सही जानकारी नहीं देता है, तो सीधा एक्शन हो सकता है। सरकार ने यह बदलाव IT (Digital Media Ethics Code) Rules 2021 में अमेंडमेंट के रूप में किया है। इसका मुख्य मकसद फेक डिजिटल कंटेंट और डीपफेक वीडियो को रोकना और लोगों को गुमराह होने से बचाना है।
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AI Content Rules 2026: PM मोदी का चेतावनी भरा संदेश
नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे AI Impact Summit में PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि AI कंटेंट सिर्फ तकनीक का मुद्दा नहीं, बल्कि यह समाज में भरोसे और सुरक्षा का सवाल भी बन गया है। उन्होंने वॉटरमार्किंग और सोर्स आइडेंटिफिकेशन को अनिवार्य करने की बात कही। इसके साथ ही ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी और साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। PM मोदी का साफ संदेश था कि गलत AI कंटेंट समाज में भ्रम और नुकसान फैलाने वाला साबित हो सकता है।
AI Content Rules 2026: SGI कंटेंट क्या है और कैसे पहचानें
नए नियमों में SGI यानी Syntheticly Generated Information की परिभाषा दी गई है। इसका मतलब है कि कोई भी डिजिटल कंटेंट, जिसे AI या कंप्यूटर की मदद से बनाया गया हो और जो असली व्यक्ति, घटना या जगह जैसा लगे, उसे SGI माना जाएगा। उदाहरण के लिए किसी नेता का फेक भाषण, सेलिब्रिटी की AI फोटो या किसी की आवाज क्लोन करके कॉल रिकॉर्डिंग। लेकिन बेसिक एडिटिंग जैसे ब्राइटनेस, क्रॉप या कंट्रास्ट SGI में नहीं आता।
AI Content Rules 2026: लेबलिंग और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
अब AI फोटो या वीडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा कि यह AI जेनरेटेड है। एक बार लेबल लग गया, उसे हटाना संभव नहीं होगा। प्लेटफॉर्म्स को AI कंटेंट अपलोड करने से पहले वेरिफिकेशन करने वाले टूल्स बनाने होंगे। इसके अलावा हर तीन महीने में यूजर्स को याद दिलाना होगा कि AI का गलत इस्तेमाल जुर्माना या जेल का कारण बन सकता है। कुछ कंटेंट जैसे बच्चों से जुड़ा अश्लील सामग्री, फेक डॉक्यूमेंट, हथियारों की जानकारी और गलत डीपफेक को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है।
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AI Content Rules 2026: यूजर और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी
अब प्लेटफॉर्म्स को गैर-कानूनी कंटेंट हटाने के लिए सिर्फ 3 घंटे मिलेंगे। अगर आदेश मिलने के बावजूद कंटेंट नहीं हटाया गया, तो प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार होगा। इसके अलावा 12 घंटे के भीतर शिकायत का जवाब देना अनिवार्य है। यूजर भी सुरक्षित नहीं हैं। AI या फेक कंटेंट शेयर करने पर सीधे कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उल्लंघन होने पर भारतीय न्याय संहिता, साइबर सिक्योरिटी कानून और POCSO एक्ट के तहत केस बन सकता है।
AI Content Rules 2026: डिजिटल दुनिया का नया दौर और सावधानी
सरकार AI को रोकना नहीं चाहती, बल्कि गलत इस्तेमाल को रोकना चाहती है। AI का उपयोग शिक्षा, हेल्थ, व्यवसाय और मनोरंजन में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन पहचान चोरी और फेक न्यूज़ में इसका इस्तेमाल खतरनाक है। सोशल मीडिया पर कंटेंट शेयर करते समय ध्यान रखें किसी का AI फेस या वॉइस बिना अनुमति पोस्ट न करें, संवेदनशील डीपफेक शेयर न करें, वायरल वीडियो फॉरवर्ड करने से पहले चेक करें और मजाक में भी फेक प्रूफ न बनाएं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार यह नियम इंटरनेट के लिए नया युग शुरू करेंगे। अब forwarded as received कहकर बचना मुश्किल होगा। जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि यूजर की भी होगी। इस कदम से ऑनलाइन भरोसा बढ़ेगा और फेक कंटेंट पर अंकुश लगेगा।
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